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27.7.09

सांस को सांस से मिलने दे ज़रा,
दर्द का एक कतरा दिल पे गिरने दे ज़रा,
तिश्नगी है धडकनों को दिल को छोड़ने की,
आज ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से बिचादने दे ज़रा,
बड़ा मासूम सा गुनाह हुआ है मोहब्बत में ,
इश्क की इस चाह्हत को थोडा और तड़पने दे ज़रा,
इस जिस्म से बस राख बन जाना चाहती हूँ
इतनी सी चाह्हत पूरी करने दे ज़रा,
करती है गीले ज़िन्दगी की घडियां,
आज मौत की बहूँ में बिखरने दे ज़रा,
बीते हुए कल से आने वाला कल बनी हूँ,
इस गुज़रे हुए वक़्त में कुछ पल जीने दे ज़रा.

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