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Tuesday, June 05, 2007

शाम होते ही ये दिल उदास होता है...

शाम होते ही ये दिल उदास होता है
टूटे ख्वाबों के सिवा कुछ ना पास होता है
तुम्हारी याद ऐसे वक़्त बहुत आती है
बंदर जब कोई आस-पास होता है

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मोहब्बातों मे ज़रा सी कसक ज़रूरी है
शिकायतों के गुलों की महक़ ज़रूरी है
कोई सवाल करूँ मैं तुमसे तो नाराज़ मत होना..
क्यों की सच्चे प्यार मे थोड़ा सा शक ज़रूरी है


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मुद्दत से दूर थे हम
आप मिले..
आप का मिलना अच्छा लगा...
सागर से गहरी लगी आपकी मोहब्बत...
तैरना तो आता था...
पैर डूबना अच्छा लगा...

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