ये न थी हमारी क़िस्मत के निसाले यार होता .
अगर और जीते रहते यही इन्तजार होता ..
तेरे वादे पे जिये हम तो ये जान झूठ जाना.
के ख़ुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होता ..
कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीरे-नीय कश को.
ये खालिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता ..
ये कहाँ की दोस्ती है के बने हैं दोस्त नासेह.
कोई चारा-साज होता कोई ग़मगुसार होता ..
रंगे-संग से टपकता वो लहू के फिर न थमता.
जिसे ग़म समझ रहे हो ये अगर शरार होता ..
कहूँ किससे मैं के क्या है शबे-ग़म बुरी बला है.
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता ..
हुए हम जो मर के रुसवा हुए क्यूँ न ग़रक़े दरिया.
न कभी ज़नाज़ा उठता न कहीं मज़ार होता ..
ये मसाईले-तसव्वुफ़ ये तेरा बयान ‘ग़ालिब’.
तुझे हम वली समझते जो न बादा-ख्वार होता ..
-मिर्जा गालिब
Saturday, July 28, 2007
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Popular Posts
-
तीन गांडू एक दूसरे की गान्ड मार रहे थे,अचानक पुलिस का छापा पड़ गया , एक को पुलिस पकड़ कर ले गयी, दूसरा भाग गया और तीसरा यह चुटकुला पढ़ रहा ह...
-
एग्ज़ॅम और सुहाग रात के बाद कामन डाइलॉग- कैसा हुआ.? अच्छा हुआ, थोड़ा बड़ा था थोड़ा छूट गया, आता था पर ठीक से कर नही पया. फिर भी जैसा हुआ ...
-
लड़का - मुझसे शादी कर लो मेरा बहुत लंबा है लड़की - क्या लड़का - अनुभव लड़की - ओके मेरा भी काफ़ी गहरा है लड़का - क्या लड़की...
-
सांता को एक दिन हिचकी आई और साथ में उसका लंड भी खड़ा हो गया सांता:- “अरे वाह लगता है बलबीर भाई के साथ भाभी जी भी याद कर रही है” *********...
-
लड़का :- अगर मैं तुम्हे किस करके भाग जाऊं तो ? लड़की:- तो क्या में ऐसा समझती कि जो लड़का पूरा पेपर कंप्लीट कर सकता था, लेकिन वो ऑब्जेक्ट...
-
माँगता हूँ तो देती नहीं हो: जवाब मेरी बात का देती हो तो खड़ा हो जाता है: रोम-रोम जज़्बात का क्यों बोलती हो के धीरे से डालो: बालों मैं फूल ...
No comments:
Post a Comment