अनेक रंग है इस पर्व के, अनेक रंग समेटे है ये
त्योहार है ये रंगों का, अनेक रंग समेटे है ये
पर्व ये ऐसा जब रंग सारे खिलते है,
बैर और दुश्मनी के दंभ सारे धुलते हैं,
बहता है रंग जो चहुं ओर
मित्रता के संगत बनते हैं
पर्व ये ऐसा जब रंग सारे खिलते है,
प्रीत की रीत के परिणय बनते हैं,
होती है मादकता हर ओर
प्रेम के मधुर पग बढ़ते हैं
पर्व ये ऐसा जब रंग सारे खिलते हैं,
जीवन पे पसरी नीरसता मिटती है,
होती है प्रसन्नता सभी ओर
नयी उमंग में सब संग बढ़ते है
अनेक रंग है इस पर्व के, अनेक रंग समेटे है ये
त्योहार है ये रंगों का, अनेक रंग समेटे है ये
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2 comments:
बहुत सुन्दर रंग-बिरंगी कविता लिखी है।अच्छी लगी।
Please give proper credit to original author who wrote it.
Please find original at :
होली के रंग : Holi k rang Kavita by ikShayar
धन्यवाद
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