ना गुजरना आज के दिन किसी मस्जिद के पास से
कही लोग चाँद समझकर रोज़ा ना तोड़ दे,
और होकर खफा खुदा तुमसे कहीं,
हुस्न बनाना ना छोड़ दे.
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बेवफा तुम हो तो वफ़ादार हम भी नही,
बेशरम तुम हो तो शरमदार हम भी नही,
प्यार के इस मोड पर आक़े कहते हो शादीशुदा हो
तो कुंवारे हम भी नहीं!
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वो दिल ही क्या जो वफ़ा ना करे,
तुझे भूल कर जिएं खुदा ना करे,
रहेगी तेरी दोस्ती मेरी जिंदगी बन कर,
वो बात और है अगर जिंदगी वफ़ा ना करे.
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