कैसे खिलेगा फूल वो टूटा जो शाख से
मिल जाएगा वो ख़ाक में आया है ख़ाक से
रंगीन हैं फ़िजाएँ तुम्हारे विसाल से
गमगीन हैं फ़िजाएँ ख़याल-ए-फ़िराक से
मर्ज़ी तेरी है तू कभी आए के न आए
आवाज़ दी है हमने तो उठउठके ख़ाक से
हैरत से न यूँ देख हमें ग़ैर नज़र से
महफ़िल में तेरी आए हैं हम इत्तेफ़ाक से
नादान है ये जान भी दे देगा इश्क़ में
इस दिल को कभी यूँ न सताओ मज़ाक से
ए रूह उसकी बेरूख़ी ने जान से मारा
हम तो गए थे मिलने बड़े इश्तियाक से
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Popular Posts
-
तीन गांडू एक दूसरे की गान्ड मार रहे थे,अचानक पुलिस का छापा पड़ गया , एक को पुलिस पकड़ कर ले गयी, दूसरा भाग गया और तीसरा यह चुटकुला पढ़ रहा ह...
-
Suhagraat ko pati patni se bolta hai Ijaajat hai? Bibi:- Hai ji. Pati poori raat kaam lagata hai. Bibi Bimar ho jati hai. Pati bibi...
-
एग्ज़ॅम और सुहाग रात के बाद कामन डाइलॉग- कैसा हुआ.? अच्छा हुआ, थोड़ा बड़ा था थोड़ा छूट गया, आता था पर ठीक से कर नही पया. फिर भी जैसा हुआ ...
-
लड़का - मुझसे शादी कर लो मेरा बहुत लंबा है लड़की - क्या लड़का - अनुभव लड़की - ओके मेरा भी काफ़ी गहरा है लड़का - क्या लड़की...
-
सांता को एक दिन हिचकी आई और साथ में उसका लंड भी खड़ा हो गया सांता:- “अरे वाह लगता है बलबीर भाई के साथ भाभी जी भी याद कर रही है” *********...
-
A good friend is like a good bra. Hard to find, very comfortable, supportive, holds you up when are down & always close to the heart. ...
No comments:
Post a Comment