आसमान में उड़ना चाहा, पंखों में कुछ तीर चुभे है
अधरो ने गाना तो चाहा, पर मन में ही गीत दबे हैं
खिलखिलके हसना तो चाहा, मुसका नोपर लगे हैं ताले
काँटों की राहों पर चलकर इन पैरों में पड़े हैं छा ले
आशाओं के वंदनवार से मन का द्वार सजाना चाहा
अपने लहू से सिँचके हमने ये गुलज़ार सजाना चाहा
हर आशा को चोट लगी है, और कलियों को ज़ख़्म मिले हैं
हाल न पूछो इस बगिया का, फूल के बदले शूल खिले हैं
चाहा कुछ था पाया कुछ है, किस्मत ने कुछ यूँ लूटा है,
पता नहीं कब हाथ से अपने ख़ुशियों का दामन छूटा है
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Popular Posts
-
एक कर्मचारी ने देखा कि उसका बॉस कार के अंदर एक लड़की का गेम बजा रहा है। कर्मचारी —” वाह सर…अकेले अकेले…..हमारा नंबर कब आएगा ?? “ बॉस —” इस ...
-
एक बिहारी महिला चेक भुनाने गई। क्लर्क: हस्ताक्षर कर दो। महिला: कैसे? क्लर्क: जैसे आप पत्र के अंत में लिखते हैं। महिला ने लिखा: " आपके च...
-
तीन गांडू एक दूसरे की गान्ड मार रहे थे,अचानक पुलिस का छापा पड़ गया , एक को पुलिस पकड़ कर ले गयी, दूसरा भाग गया और तीसरा यह चुटकुला पढ़ रहा ह...
-
एक ब्यूटी पार्लर के बाहर एक लाइन लिखी थी , -" यहाँ से निकलने वाली लड़कियों को सीटी ना बजाए , वो आपकी दादी हो सकती हैं. " ***...
-
प्लेटफार्म पर एक औरत को इतनी ज़ोर से हिचकी आयी के उसकी सलवार उतर गयी.. वो मुस्कुराके बोली.. "आज तो याद करने वाले ने हद ही कर दी...
-
पप्पू interview देने गया Boss : बताओ वो कौन सी चीज़ है जिसके दो टायर होते हैं ...?? . पप्पू : Bike ! . Boss: नहीं HONDA Bike ;) ...
No comments:
Post a Comment