बहुत मुश्किलो के बाद,
अब जाकर कही पाया है तुझे...
कितने इम्तिहानो के बाद,
अब जाकर कही तेरे जैसा साथी मिला है मुझे...
कितने झोके आए,
कितने झोके गये,
पर एक पल के लिए भी,
एक दूजे का हाथ ये,
हालात छूटा नही पाए...
अब मत जुड़ा होना मुझसे कभी,
कही तक कर हार ना जाए,
तेरा ये आशिक़ कभी...
पहले ही बहुत बार सता चुकी हो तुम,
मुझसे दूर जाकर बहुत तडपा चुकी हो तुम,
अब ना जाना मुझसे दूर कभी,
ए हमनशीं ये दिल,
और जुदाई से नही पाएगा...
माना जुदाई के बाद मिलन का,
सुकून ही कुछ और होता है,
मगर वो दो पल की जुदाई,
भी मेरा दिल अब से नही पाएगा...
तुझसे जुड़ा होते ही अब,
तेरे आशिक़ का दूं टूट जाएगा...
Tuesday, August 19, 2008
Wednesday, August 06, 2008
अगले जनम में ...
अगले जनम में भी इतनी अच्छी रहे वो...
इतना सा बदल जाये मुझे अपना कहे वो
दुनिया का दर्द हो तो आँसू चाहे बहे वो
जब उस का दुख मिले आँखों में रहे वो
मैं सागर बन जायूं वो लहर नदी की..
साहिल साहिल शाम सहर साथ बहे वो
ये सिफ़त कायम रहे दिल उसका पढ़ सकूँ
कुछ भी ना सुनू मैं कुछ भी ना कहे वो
इस जनम मेरे दिल में है अगले जनम में
दिल में भी रहे वो मेरे घर भी रहे वो
इस बार की मुहब्बत तो मेरी ख़ाता है
जब प्यार करूँ मैं क्यों दर्द सहे वो
उस बात का चाहे मानी कोई ना हो
कभी कानो में मेरे इक बात कहे वो
इतना सा बदल जाये मुझे अपना कहे वो
दुनिया का दर्द हो तो आँसू चाहे बहे वो
जब उस का दुख मिले आँखों में रहे वो
मैं सागर बन जायूं वो लहर नदी की..
साहिल साहिल शाम सहर साथ बहे वो
ये सिफ़त कायम रहे दिल उसका पढ़ सकूँ
कुछ भी ना सुनू मैं कुछ भी ना कहे वो
इस जनम मेरे दिल में है अगले जनम में
दिल में भी रहे वो मेरे घर भी रहे वो
इस बार की मुहब्बत तो मेरी ख़ाता है
जब प्यार करूँ मैं क्यों दर्द सहे वो
उस बात का चाहे मानी कोई ना हो
कभी कानो में मेरे इक बात कहे वो
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शायरी
तेरी आँखों मे ...
तेरी आँखों मे मेरे ख्वाब नज़र आते हैं, जब भी मैं कुछ कहूँ तो बस तेरे ही अल्फाज़ नज़र आते हैं,
ये कोई तिलिस्म है या बस हमारे रिश्ता,
की मेरी हर धड़कन मे तेरे ही साज नज़र आते हैं,
तुझसे मैं हूँ या मुझमे हो तुम बसी,
मेरी साँसों से जुड़े तेरे दिल के तार नज़र आते है,
जब भी ये आँसू मेरी आँखों को सताते हैं,
तेरे आँचल की ठंढक से मेरी मुस्कान नज़र आते है,
तुम्हे मैं माँ कहूँ या बस एक ठंडी हवा,
की मेरे सारे दर्द तेरी पनाह मे घुल जाते हैं,
तेरी आँखों मे मेरे ख्वाब नज़र आते हैं...............................
ये कोई तिलिस्म है या बस हमारे रिश्ता,
की मेरी हर धड़कन मे तेरे ही साज नज़र आते हैं,
तुझसे मैं हूँ या मुझमे हो तुम बसी,
मेरी साँसों से जुड़े तेरे दिल के तार नज़र आते है,
जब भी ये आँसू मेरी आँखों को सताते हैं,
तेरे आँचल की ठंढक से मेरी मुस्कान नज़र आते है,
तुम्हे मैं माँ कहूँ या बस एक ठंडी हवा,
की मेरे सारे दर्द तेरी पनाह मे घुल जाते हैं,
तेरी आँखों मे मेरे ख्वाब नज़र आते हैं...............................
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