सांस को सांस से मिलने दे ज़रा,
दर्द का एक कतरा दिल पे गिरने दे ज़रा,
तिश्नगी है धडकनों को दिल को छोड़ने की,
आज ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से बिचादने दे ज़रा,
बड़ा मासूम सा गुनाह हुआ है मोहब्बत में ,
इश्क की इस चाह्हत को थोडा और तड़पने दे ज़रा,
इस जिस्म से बस राख बन जाना चाहती हूँ
इतनी सी चाह्हत पूरी करने दे ज़रा,
करती है गीले ज़िन्दगी की घडियां,
आज मौत की बहूँ में बिखरने दे ज़रा,
बीते हुए कल से आने वाला कल बनी हूँ,
इस गुज़रे हुए वक़्त में कुछ पल जीने दे ज़रा.
Monday, July 27, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Popular Posts
-
तीन गांडू एक दूसरे की गान्ड मार रहे थे,अचानक पुलिस का छापा पड़ गया , एक को पुलिस पकड़ कर ले गयी, दूसरा भाग गया और तीसरा यह चुटकुला पढ़ रहा ह...
-
एग्ज़ॅम और सुहाग रात के बाद कामन डाइलॉग- कैसा हुआ.? अच्छा हुआ, थोड़ा बड़ा था थोड़ा छूट गया, आता था पर ठीक से कर नही पया. फिर भी जैसा हुआ ...
-
एक बिहारी महिला चेक भुनाने गई। क्लर्क: हस्ताक्षर कर दो। महिला: कैसे? क्लर्क: जैसे आप पत्र के अंत में लिखते हैं। महिला ने लिखा: " आपके च...
-
रमेश: सुना है लाॅक डाउन में घरेलू हिंसा के मामले ..... काफी बढ़ गये है, तुम्हारे यहां क्या हाल है? सुरेश: हम तो टाइम से बर्तन, झाड़ू, प...
-
lady- बेटा पहली बार घर आये हो कुछ तो लेना ही पडेगा! papu - ठीक है आंटी, लेट जाओ बिस्तर पर Aunty - भोसडी के... दोबारा घर में कदम रखा तो टाग...
-
प्लेटफार्म पर एक औरत को इतनी ज़ोर से हिचकी आयी के उसकी सलवार उतर गयी.. वो मुस्कुराके बोली.. "आज तो याद करने वाले ने हद ही कर दी...
No comments:
Post a Comment