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Sunday, March 06, 2011

Hindi Shayari | Love Shayari

उनके दीदार के लिए दिल तड़पता है
उनके इंतेज़ार में दिल तरसता है
क्या कहें इस कम्बख़्त दिल को
जो अपना होकर भी किसी और के लिए धड़कता है







दिल तो उनके सीने में भी मचलता होगा


हुस्न भी सौ-सौ रंग बदलता होगा


उठती होंगी जब नगाहें उनकी


खुद "खुदा" भी गिर-गिर के संभलता होगा






लोग अपनो से रिश्ता भी तोड़ देते है,
गैरों का दामन थम लेते है,
हम तो एक फूल भी ना तोड़ पाए,
लोग तो दिल भी कैसे . देते है



3 comments:

altafhusainjouhary said...

मुस्कराहट पे तेरी न जाने कितने फ़िदा होंगे
खाई थी कसम हमने न कभी जुदा होंगे
ज़र्रा हूँ मै ज़मी का और अज़ीम शख्सियत तेरी
मै तेरा बंदा ही सही और तुम मेरे खुदा होंगे
.....अल्ताफ हुसैन .......

altafhusainjouhary said...

मुस्कराहट पे तेरी न जाने कितने फ़िदा होंगे
खाई थी कसम हमने न कभी जुदा होंगे
ज़र्रा हूँ मै ज़मी का और अज़ीम शख्सियत तेरी
मै तेरा बंदा ही सही और तुम मेरे खुदा होंगे
.....अल्ताफ हुसैन .......

altafhusainjouhary said...

बे माया है दारा और सिकंदर मेरे आगे
कतरा नज़र आता है समन्दर मेरे आगे
अखलाक की दौलत का शहेंशाह हूँ ''सुलैमा''
बे वजह नहीं झुकते तवंगर मेरे आगे ..........सुलेमान ईरानी
पेशकश ........अल्ताफ हुसैन जौहरी ..........

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